टीचर जी, टीचर जी - शिक्षक दिन कविता
टीचर जी, टीचर जी *टीचर जी, टीचर जी* आपकी छाया के बिना, नहीं है फ़्यूचर जी। कैसे मिट्टी से मूरत बनाते, पुस्तक के पन्नों पर दुनिया घुमाते। मुरझाए फूल भी यूँ मुस्काते, सीखा आपसे — जीना है हमको, कल से बेहतर जी। ज्ञान की पूजा को सिखा आपसे, गिरकर संभलना है सीखा आपसे। सोचूं कभी मैं अपने आप से, रहते हो कैसे सीधे और सादे, ताज पहनकर जी? दुनिया की महफ़िल में कितने नज़ारे, मंज़िल से हमको भटकाते हैं सारे। आपके क़दमों की पावन दिशाएं, हमको सिखाती हैं — जीवन है आगे, जीवन से बढ़कर जी।